॥ १ ॥
अब हम सप्तला और शङ्खिनी के कल्प की व्याख्या करेंगे।
शब्दशः अर्थ
- अथअब
- अतःइसलिए
- सप्तला-शङ्खिनी-कल्पंसप्तला और शङ्खिनी के कल्प को
- व्याख्यास्यामःव्याख्या करेंगे
व्याख्या
यह अध्याय का प्रारम्भिक वाक्य है, जो चरक संहिता के हर अध्याय के आरम्भ में इसी ढंग से आता है। 'कल्प' का अर्थ यहाँ किसी औषधि के बनाने और प्रयोग करने के योग और विधियाँ हैं। इस अध्याय में सप्तला और शङ्खिनी नामक दो औषधीय पौधों के योगों की व्याख्या की जाएगी; वक्ता ग्रन्थ के उपदेशक हैं और वे अपने शिष्यों के लिए बोल रहे हैं।